पहाड़ में सकारात्मक बदलाव के कुछ युवा चेहरे।


Uttarakhand Youth
 पहाड़ में सकारात्मक बदलाव के कुछ युवा चेहरे। 

यूँ तो बहुत युवा पहाड़ को एक नयी सोच देने में लगे हैं, पर इनमें से कुछ युवाओं और उनके कामों को देखता पढ़ता हूँ तो पहाड़ में एक सवेरा आता तो लगता है। जिनका जिक्र इस लेख में आगे है  इनमें से ज्यादातर किसी न किसी तरह मेरे सोशल नेटवर्क में जुड़े हैं।  


१। दीप नेगी : टिहरी का एक ऐसा युवा जो लिखता है, गाता है, एक्टिंग करता है, इंटरपेनॉर है और सामाजिक सेवा में समर्पित है। पहाड़ की गुड़िया को जन्म देने वाले दीप और उसके दोस्तों की सोच, फ्योंली को एक अलग मुकाम पर ले जा रही है।  किसी गुड़िया से पहाड़ी गीत सुनने और फिर पहाड़ी परिधान पहने देखना सुकुन देता है। उससे अलग दीप नेगी और उसके दोस्तों की "सोच" नामक सामाजिक संस्था जिस तरह इस करोना काल में लोगों की सहायता कर रही है उसे देखकर इन युवाओँ के सामने मस्तक तो झुकता है।

  

२। विनोद गढ़िया : सोशल मीडिया पर फूलदेई से लेकर न जाने कितने ही त्योहारों जैसे हरेला, होली, घ्यू त्यार, भिटोली, खतडुवा को फिर से जिन्दा करने वाले विनोद भाई के बनाए पोस्टर उत्तराखंड के हर लोक पर्व पर पूरे विश्व में भेजे जाते हैं। इनके और इनके दोस्तों द्वारा चलाये जा रहे ऑनलाइन ई-कुमाऊं और मेरा पहाड़ पर पहाड़ के रोचक और ज्ञानवर्धक  साहित्य का अच्छा संग्रह है।  


३। विपिन सेमवाल : केदारघाटी का ऐसा युवा जो वैसे पेशे से पत्रकार है पर "उपहार" नामक अपनी संस्था से कई गरीब लोगों के घर बनवा चुके हैं और कई गरीब बच्चियों की शादी का खर्च उठा चुके हैं।  अकेले चलकर सामाजिक चेतना की मशाल जलाना और उसमें कई लोगों को शामिल कर सकारात्मक परिवर्तन करना इस युवा के लिए इतना आसान तो नहीं होगा। कोविड पर कई सामाजिक चेतना की लघु  फिल्में बनाकर भी लोगों को गुदगुदाने वाले इस युवा के बारे जानना भी और अच्छा लगेगा।  


 ४। रमन शैली :  पहाड़ के युवा  को गर्व से पहाड़ी टोपी और पहाड़ी टी-शर्ट पहनाने वाला गौचर का ये युवा बिलकुल नई सोच लिए हुए हैं।  अलग-अलग ऐप बनाकर पहाड़ को नए तरीके से दिखाने के इनके प्रयासों पर आपकी नज़र जाएगी तो गर्व जरूर होगा ।   


५। विनीत चंद्र पोस्ती : वर्तमान में पार्षद, नगर पालिका श्रीनगर और पूर्व अध्यक्ष छात्र संघ गढ़वाल विश्वविद्यालय विनीत राजनीति के साथ-साथ समाज सेवा में जुड़ा एक ऐसा युवा चेहरा है जो इसी तरह काम करता रहे तो पहाड़ बदल सकता है।  


६। अंजलि सेमवाल : पूर्व में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् की उत्तरांचल छात्रा प्रमुख, ऍम के पी कॉलेज की छात्र संघ उपाध्यक्ष  और वर्तमान में बीजेपी के युवा मोर्चा के स्टडी में शामिल अंजलि विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़कर  अनेक लोगों की सहायता में लगी है । 


७। मेघा थापा मल्ला : एक युवती जो युवतियों के स्वरोजगार की मुहीम चलाये है। युवती नामक संस्था से कईयों के घर चलाने वाली मेघा के सामाजिक योगदान की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है।  


८। राखी धनाई  : पहाड़ की बच्चियों के जीवन एक अनदेखे टैबू को तोड़ने वाली राखी कभी बड़े मंचों को संभालती नजर आती है तो कभी अपने हँसाने वाले वीडियो बनाकर पहाड़ को हँसाती हैं । खेतों से लेकर बड़े कॉर्पोरेट ऑफिस के जीवन को सामान सादगी से जीती ये पहाड़न, पहाड़ के उदार और हंसमुख चेहरे की गंभीरता को दर्शाती है। 


९। आनंद शुक्ला : श्री केदार ३६० ट्रस्ट के अध्यक्ष आनंद आने वाले दिनों के उत्तराखंड के तथ्यपरक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक लेखों को लिखने और संपादन करने वाला एक नया चेहरा बनेगा । 


१०।  सुशील शुक्ला : बेबाकी से सोशल मीडिया पर अपने विचार रखने वाला ये युवा केदार घाटी के गांवों में सोच और संकल्प की नई लहर जगाने का काम कर रहा है। अपनी निजी सेवा के कामों के बाद भी केदार आपदा से लेकर कई सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यो में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने वाले इस युवा के भविष्य के कदम भी नए मानक स्थापित करेंगे। 


११ । दिवाकर गैरोला : न्यूज उत्तराखंड धरोहर के डायरेक्टर अपनी लेखनी की प्रगाढ़ता के साथ-साथ केदार घाटी में अपनी टीम के साथ होम-स्टे की संकल्पना को यथार्थ के धरातल पर लाते हुई उनकी कोशिशें पहाड़ में पर्यटन को नई दिशा दे सकती हैं।  


ये सब युवा पहाड़ के दर्द को समझते हुए पहाड़ के लिए काम करते जब दिखते हैं तो एक सुकुन सा लगता है कि पहाड़ की ये नई पीढ़ी, मेरी पीढ़ी या उससे पहले की पीढ़ियों के ज्यादातर लोगों की तरह  केवल अपने बारे में ही नहीं सोचती बल्कि समग्र पहाड़ के विकास की सोच रखती है। 

जब भी टाइम मिला जल्दी कड़ी में कुछ ऐसे ही युवाओं के बारे में फिर लिखने की कोशिश रहेगी।

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इंडोनेशिया से श्री मनीष सेमवाल का लेख। 

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