शिक्षण जगत में एक नई शुरुआत "द टीचर्स शो"!



लेख -✍️अशोक जोशी (जनपद चमोली उत्तराखंड से)


यूं तो शिक्षा के व्यापक अर्थ को साहित्य के पन्नों में सहेजना मुमकिन नहीं, किंतु समय- समय पर शिक्षा के विचारकों ने प्रायः इसे अपने पृथक-पृथक अर्थों में बयां किया है। शिक्षा को किसी संसाधन से जोड़ें या उपकरण से,  इस पक्ष पर दार्शनिकों के कई अपने मत है।  बहरहाल मेरे अर्थों में शिक्षा समाज के लिए किसी मूल स्तंभ से कम नहीं। सीखना शिक्षा का एक प्रारंभिक गुण रहा है। शिक्षा सीखने सिखाने की एक ऐसी क्रिया है,  जिसमें ज्ञान, दक्षता, आचरण आदि के कई भाव समाविष्ट है। किंतु आधुनिक समय में शिक्षा एक ऐसे प्रतिस्पर्धी समाज का हिस्सा बन चुकी है, जो वास्तविक अर्थ में शिक्षा के मूल्यों से बिल्कुल इतर है।
सरलता और सुलभता ही शिक्षा के अर्जन का एक स्रोत नहीं है, बल्कि जटिलता और दुर्लभता से भी हमें एक नई शिक्षा और सीख  मिलती है।
 कोरोना की विश्वव्यापी वैश्विक महामारी ने जहा देश की आर्थिकी और विकास को पीछे धकेला है, और आम जनमानस के जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित किया है। तो वहीं दूसरी ओर कई विशेष लोगो के लिए विकटता का यह दौर अवसरों की एक नई सौगात लेकर भी आया है। इन अवसरों का संबंध न केवल किसी व्यक्ति विशेष से है अपितु समाज का एक बहुहित भी इनकी उपलब्धि का हिस्सा है। आधुनिक परिदृश्य में संस्था शिक्षा को क्रियान्वित करने का एक महत्वपूर्ण जरिया अवश्य है। किंतु दौर ने कहीं ना कहीं संस्थागत शिक्षा को भी एक नया आयाम देने की ओर अपना संकेत किया है। जिसे शिक्षा के कर्मयोगियों ने निसंदेह स्वीकार भी किया है। और इस दिशा में अपने प्रयासों को जुटाना भी आरंभ कर दिया है।
 जी हां साथियों इस बीच शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐसा ही कुछ नूतन प्रयोग बनकर उभर आया है, हल्द्वानी से संचालित होने वाला बहुप्रतिभाओं का "द टीचर्स शो"  संस्कृति, साहित्य,रंगमंच जैसी तमाम विलक्षण प्रतिभाओं का यह संगम आज न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बना चुका है।


ऐसे हुई द टीचर्स शो की शुरुआत ! 

अपने किस्म का यह अनोखा शो आज हर किसी के लिए एक चर्चा का विषय बन चुका है।  शाम 7:00 बजे सोशल मीडिया के फेसबुक पेज "विविधा" और यूट्यूब के माध्यम से प्रसारित किया जाने वाला यह शो, शिक्षा रचनात्मकता जैसी तमाम गतिविधियों का एक ऐसा सामंजस्य केंद्र बन चुका है। जिसकी कल्पना शायद ही इससे पूर्व किसी ने की हो, अपने 151 वें एपिसोड तक यह शो दैनिक रूप से संचालित किया गया किंतु अब इसे सप्ताहिक रूप में हर बृहस्पतिवार को आयोजित किया जा रहा है। जनपद नैनीताल के हल्द्वानी से शुरुआत होने वाले इस शो से न केवल शिक्षाविदों और छात्रों को एक नई सीख मिल रही है। बल्कि समाज का हर वर्ग प्रेरणा और ज्ञान के इस उद्गम से जुड़ा हुआ है। तमाम क्षेत्रों के पुरोधाओ से परस्पर संवाद का यह लाइव अपूर्व शो आज देश के हर नागरिक तक अपनी छाप छोड़ रहा है। शो का जन्म एक ऐसे दौर में हुआ है, जब पूरा विश्व कोरोना के एक बेहद ही नाजुक पल से कराह रहा है और चारों तरफ एक नकारात्मक ही नकारात्मक ऊर्जा संचारित हो रही थी। ऐसे माहौल में शिक्षक डॉ देवकीनंदन भट्ट जी के मन में सकारात्मकता की दिशा में "द  टीचर्स शो" नामक इस अद्भुत कार्यक्रम का अंकुर फूटा। जिसकी शुरुआत उन्होंने दिनांक 14 जून 2020 से की।  महज एक वर्ष के अंतराल में ही यह शो आज अपनी बुलंदी के चरम पर है।
शिक्षा के एक नए प्लेटफार्म के रूप में निरंतर यह शो आज अपनी चमक को आम जनमानस के बीच बिखेर रहा है। इस अनोखे शो ने न सिर्फ छात्रों बल्कि शिक्षकों में भी सीखने के एक नए भाव को जागृत किया है। शिक्षा को किताबी ज्ञान तक ही न समेटकर शो की  इस डिजिटल पहल ने यह सिद्ध किया है कि व्यावहारिकता,  सामाजिकता, रचनात्मकता जैसे कई और तत्व भी शिक्षा के एक अद्वितीय अंग है। इन तमाम बातों को प्रकाश में लाकर रटन्ति विद्या को भी इस शो ने अपना एक आईना दिखाया है। 
"द टीचर्श शो" नामक इस लाइव वार्ता में अब तक राज्यस्तर के शिक्षकों सहित हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक,तमिलनाड,  गोवा , दमन-दीव ,हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश ,केरल, मध्यप्रदेश, पश्चिम.बंगाल जैसे तमाम अन्य राज्यों के  कलाधर्मी  शिक्षक भी भाग ले चुके हैं।  जो अपने जीवन के तमाम महत्वपूर्ण अनकहे अनुभवों और किस्सों को एक प्रेरणा के रूप में हम तक साझा कर रहे हैं।


"द टीचर्श शो" के भागीरथ मेजबान महामना डॉक्टर देवकीनंदन भट्ट जी ! 

मूल रूप से जनपद नैनीताल के ओखलकांडा विकासखंड के झड़गांव से ताल्लुक रखने वाले डॉ देवकीनंदन भट्ट जी "द टीचर्श शो" के मुख्य आयोजक व संचालक है। साहित्य, लेखन, पर्यटन, फोटोग्राफी , पत्रकारिता खेल जैसे  कई  क्रियाकलापों में दक्ष,  कौशल,  प्रखर  बहुप्रतिभा के धनी डॉ भट्ट जी इस शो के एक ऐसे मूर्धन्य पात्र हैं, जिन्होंने इसे बुलंदी तक पहुंचाने में अपनी  महत्वपूर्ण अग्रणी भूमिका अदा की है। डॉ देवकीनंदन जी की प्राथमिक शिक्षा गांव के सरकारी विद्यालय में ही संपन्न हुई। पहाड़ों से विशेष लगाव रखने वाले डॉ भट्ट जी ने शिक्षा के क्षेत्र के कई खिताब अपने नाम दर्ज किए हैं। और आज उसी की बदोलत उनका "द  टीचर्स शो" शिक्षा के एक नए अविष्कार के रूप में शुमार है। वर्तमान समय में डॉ भट्ट जी राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय बद्रीपुरा हल्द्वानी में सरकारी शिक्षक के पद पर कार्यरत है।


शिक्षा क्षेत्र की तमाम बड़ी हस्तियां बन चुकी है "शो" का हिस्सा ! ---

" द टीचर्स शो है ये सरकार
 चलो जी हो जाओ तैयार...  
 यहां हर टीचर सरकारी है 
और ये सबसे असरकारी है
  हमारा सो सब पर भारी है
 यह जब से शुरू हुआ 
जारी है जारी है... 
द टीचर्स शो है ये सरकार ।

उक्त पंक्तियों से आगाज होने वाले इस अप्रतिम शो के मेजबान डॉक्टर देवकीनंदन जी और उनके सहयोगी शिक्षक साथी आज इस कार्यक्रम को एक शीर्ष अंजाम तक पहुंचा चुके हैं। अलग-अलग एपिसोड में प्रसारित होने वाले इस शो में सीसीआरटी ( सांस्कृतिक श्रोत एवं प्रशिक्षण संस्थान ) के पूर्व निदेशक डा.गिरीश जोशी जी विशेष टिप्पणीकार की भूमिका में हैं। उनके साथ ही राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित उत्तराखंड राज्य गीत के लेखक देश के जाने माने उद्घोषक डा.हेमंत बिष्ट जी (सेवानिवृत राजकीय शिक्षक ) और मुकेश प्रसाद बहुगुणा जी सह संचालक और टिप्पणीकार के रूप में प्रतिभाग कर रहे हैं ।
गुजरात में मस्ती की पाठशाला चलाने वाले राकेश नवानदीसर (राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित), पांच विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने वाले राजकुमार चंदन (मध्य प्रदेश), दिल्ली के कई रिकॉर्ड स्थापित करने वाले आलराउंडर शिक्षक कृष्ण कुमार वर्मा, गुजरात के विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने वाले और राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक डॉ भावेश पंड्या, चाक पर हजारों मूर्त्तियां बनाकर इतिहास बनाने वाले गुजरात के शिक्षक जयेश कुमार सोमेश्वर प्रजापति, पर्यावरण संरक्षण के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित कल्याण सिंह रावत,
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर सुरेश शर्मा, हैप्पीनेस कैरीकुलम कमेटी, दिल्ली के चेयरमैन और दरियागंज डायट के प्राचार्य डॉ राजेश कुमार, बरेली (उत्तर प्रदेश) के संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ प्रदीप सिंह, मुंबई और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित बंगलुरू के शिक्षक दत्तात्रेय अरण्यकट्टे, थिम्पू (भूटान) के शिक्षक नरेंद्र सिंह डांगी जी जैसी कई महत्वपूर्ण शख्सियते अपनी उपस्थिति को दर्ज कर इस कार्यक्रम के प्रमुख भागीदार बन चुके हैं।


शिक्षा मंत्री श्री अरविंद पांडे जी भी कर चुके हैं "शो" में शिरकत ! --
 राज्य के वर्तमान शिक्षा एवं खेल मंत्री श्री अरविंद पांडे जी भी स्वयं इस शो के 100 वे एपिसोड में अपनी दस्तक देकर, इस शो की खूब सराहना कर चुके है। शो के संचालक डॉ भट्ट जी बताते हैं कि माननीय श्री अरविंद पांडे जी का किरदार इस शो में न केवल एक मुख्य अतिथि के रूप में रहा है, बल्कि शो की शुरुआत के वह स्वयं एक प्रेरणा स्रोत भी रहे हैं। शिक्षा मंत्री जी की पर्यावरण संरक्षण हेतु आयोजित की गई  हरेला यात्रा से प्रभावित होकर ही डॉ भट्ट जी का रुख एक नई पहल के रूप में इस शो की ओर हुआ।
कार्यक्रम के सहयोगी शिक्षक मुकेश प्रसाद बहुगुणा जी के अनुसार इस शो के अब तक कुल 177 एपिसोड हो चुके हैं।  जिनका मुख्य उद्देश्य शिक्षा को कला से जोड़कर और भी रुचिपूर्ण और सरस बनाना है। उत्तराखंड के अतिरिक्त अन्य राज्यों में भी इस शो को लेकर लोगों में काफी लोकप्रियता है। शिक्षक जागेश्वर जोशी जी के द्वारा इस शो के कार्टून तैयार किए गए हैं।
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